Operating System

ऑपरेटिंग सिस्टम | Operating system in hindi

क्या आपने कभी सोचा है कि कंप्यूटर कैसे काम करता है? कैसे यह आपके कमांड्स को समझता है और उन्हें पूर्ण करता है? यह सब कुछ ऑपरेटिंग सिस्टम की मदद से होता है, जो एक कंप्यूटर की मांगों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस लेख में, हम ऑपरेटिंग सिस्टम के महत्व और कार्यों की एक सरल जानकारी प्रदान करेंगे, ताकि आप इसके महत्व को समझ सकें।

ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है? | what is operating system

ऑपरेटिंग सिस्टम, जिसे कम्यूटर साइंस में ऑएस के रूप में संक्षेपित किया जाता है, एक सॉफ़्टवेयर है जो कंप्यूटर और उपयोगकर्ता के बीच एक माध्यम के रूप में काम करता है। यह कंप्यूटर के हार्डवेयर को प्रबंधित करता है और कंप्यूटर प्रोग्राम्स को संचालित करने में मदद करता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम का मुख्य उद्देश्य कंप्यूटर के हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर के बीच संवाद स्थापित करना है ताकि उपयोगकर्ता के द्वारा दी गई कमांड्स को पूरा कर सके। यह कंप्यूटर के सभी प्रकार के कार्यों को प्रबंधित करता है, जैसे कि फ़ाइल संग्रहण, मल्टीटास्किंग, उपकरणों के प्रबंधन, और यूज़र इंटरफ़ेस का प्रबंधन।

ऑपरेटिंग सिस्टम के बिना, कंप्यूटर केवल एक बेहिचक डिवाइस होता जिसे हम नहीं समझ पाते। यह उपयोगकर्ता के द्वारा दी गई कमांड्स को कंप्यूटर के हार्डवेयर के लिए समझाता है और कंप्यूटर के सभी उपकरणों को संचालित करने में मदद करता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम का इतिहास | History of Operating System

ऑपरेटिंग सिस्टम का इतिहास कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह कंप्यूटर तकनीकी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऑपरेटिंग सिस्टम का इतिहास कई दशकों के दौरान हुआ है, और इसकी विकास के साथ ही कंप्यूटरों की तकनीकी यात्रा में महत्वपूर्ण परिवर्तन आए हैं।

1. 1940s – प्रारंभिक इतिहास:

  • पहले कंप्यूटर सिस्टम में ऑपरेटिंग सिस्टम का अभाव था।
  • कंप्यूटर के प्रयोक्ता को हार्डवेयर के साथ सीधे इंटरएक्ट करना पड़ता था।
  • प्रोग्राम्स पांच इंच के पंचकों में दर्ज किए जाते थे और कंप्यूटर को बदलने के लिए पंचक की स्थिति को बदलना पड़ता था।

2. 1950s – डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम:

  • इस दशक में डिस्क ड्राइव्स का प्रयोक्ष किया गया और इससे डेटा संग्रहण में सुधार हुआ।
  • पहले वायर्चुअल मेमरी का उपयोग हुआ, जिससे प्रोग्राम्स को मेमरी में लोड करने में सुविधा हुई।

3. 1960s – मल्टीप्रोग्रामिंग:

  • इस दशक में मल्टीप्रोग्रामिंग का प्रथम उपयोग हुआ, जिसमें कई प्रोग्राम्स एक साथ चलाए जा सकते थे।
  • IBM ने एक पूर्ण ऑपरेटिंग सिस्टम, OS/360, का विकास किया।

4. 1970s – उच्च स्तरीय ऑपरेटिंग सिस्टम:

  • इस दशक में उच्च स्तरीय ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे UNIX का विकास हुआ।
  • UNIX ने मल्टीप्रोग्रामिंग, नेटवर्किंग, और बहुउपयोगकर्ता पर्यावरण को समर्थित किया।

5. 1990s – विंडोज और इंटरनेट:

  • इंटरनेट के आगमन ने ऑपरेटिंग सिस्टम को नेटवर्किंग के लिए तैयार किया।
  • विंडोज 95 और 98 के साथ माइक्रोसॉफ्ट के ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रचलन बढ़ा।

6. 2000s – मोबाइल और स्मार्टफ़ोन:

  • स्मार्टफ़ोनों और टैबलेट्स के आगमन ने मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टमों का विकास किया, जैसे कि Android और iOS।

7. 2010s – वर्चुअलिज़ेशन और ब्लॉकचेन:

  • वर्चुअलिज़ेशन और ब्लॉकचेन के डोमेन में नए ऑपरेटिंग सिस्टम विकसित हुए, जो बड़े डेटा सेंटर्स और डिस्ट्रिब्यूटेड डेटा के लिए महत्वपूर्ण हैं।

8. आज का समय – स्मार्ट ऑपरेटिंग सिस्टम:

  • आज के समय, हमारे पास विभिन्न प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम हैं, जैसे कि Microsoft Windows, macOS, Linux, Android, और iOS।
  • ये सिस्टम हमें कंप्यूटर और मोबाइल डिवाइस का सही तरीके से उपयोग करने में मदद करते हैं और हमारे दैनिक जीवन में अनगिनत सेवाएँ प्रदान करते हैं।

9. भविष्य का दृष्टिकोण: – ऑपरेटिंग सिस्टम का निरंतर विकास हो रहा है, और भविष्य में और भी नई तकनीकी उन्नतियों के साथ आएगा। – अब तक के साथ ऑपरेटिंग सिस्टम ने हमारे डिजिटल जीवन को सुविधाजनक बनाया है, और आने वाले समय में भी यह हमारे तकनीकी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा।

यह था ऑपरेटिंग सिस्टम के इतिहास का संक्षेप। यह इतिहास दिखाता है कि कैसे ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटरों के उपयोग को बेहतर और सुविधाजनक बनाने के लिए समय के साथ कई बड़े चरणों में विकसित हुआ है।

लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम | Linux operating system in hindi

लिनक्स एक मुक्त और ओपन सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम है, जिसका नाम उसके निर्माता लिनस टोरवाल्ड्स के नाम पर है। यह सिस्टम एक पावरफुल, स्थिर और अनुकूलनीय ऑपरेटिंग सिस्टम है, और यह विभिन्न प्रकार के कंप्यूटर और डिवाइसों के लिए उपलब्ध है। इस लेख में, हम लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में हिंदी में विस्तार से जानेंगे, इसके मुख्य विशेषताओं को वर्णित करेंगे और उसके उपयोग के कुछ उदाहरण देंगे।

लिनक्स क्या है?

लिनक्स एक ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसे लिनस टोरवाल्ड्स ने 1991 में विकसित किया था। यह एक मुक्त और ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर है, जिसका मतलब है कि यह सॉफ़्टवेयर का स्रोत कोड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होता है, और उपयोगकर्ताओं को इसे बिना किसी मूल्य के डाउनलोड और मॉडिफ़ाय करने की अनुमति देता है। लिनक्स ने कंप्यूटिंग के कई क्षेत्रों में व्यापक उपयोग पाया है, जैसे कि सर्वर, डेस्कटॉप, मोबाइल डिवाइस, नेटवर्किंग डिवाइस, और बहुत कुछ।

लिनक्स की मुख्य विशेषताएँ:

  1. मुक्त और ओपन सोर्स: लिनक्स एक मुक्त सॉफ़्टवेयर है, जिसका स्रोत कोड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। इसका मतलब है कि कोई भी उपयोगकर्ता इसे मॉडिफ़ाय कर सकता है और अपनी आवश्यकताओं के अनुसार तुड़वा सकता है।
  2. सुरक्षा: लिनक्स को सुरक्षित माना जाता है क्योंकि यह एक स्थिर और सुरक्षित प्लेटफ़ॉर्म प्रदान करता है। लिनक्स के बहुत सारे सुरक्षा उपाय होते हैं, जैसे कि फ़ायरवॉल्स, डिस्क एन्क्रिप्शन, और अन्य सुरक्षा सुविधाएँ।
  3. स्थिरता: लिनक्स एक स्थिर और प्रतिस्पर्धी ऑपरेटिंग सिस्टम है। यह कम क्रैश होता है और लंबे समय तक चल सकता है बिना किसी अद्यतन के।
  4. विविधता: लिनक्स कई विभिन्न डिस्ट्रीब्यूशन्स (जैसे कि Ubuntu, Fedora, Debian, CentOS) में उपलब्ध है, जो उपयोगकर्ताओं को उनकी आवश्यकताओं के आधार पर चुनने की स्वतंत्रता प्रदान करते हैं। हर डिस्ट्रीब्यूशन अपनी विशेषता और उपयोगकर्ता अनुकूलनीयता के साथ आती है।

लिनक्स के उपयोग:

लिनक्स का उपयोग कई तरह के कार्यों में किया जा सकता है, निम्नलिखित कुछ उदाहरण हैं:

  1. वेब डेवलपमेंट: वेब डेवलपर्स लिनक्स का उपयोग अपने वेब साइट और एप्लिकेशन के विकास में करते हैं। लिनक्स पर उपलब्ध टूल्स और संवादक उपकरण वेब विकास को सुविधाजनक बनाते हैं।
  2. सर्वर: बहुत सारे वेब सर्वर और डेटा सर्वर लिनक्स पर चलते हैं। यह एक सुरक्षित और स्थिर सर्वर ऑपरेटिंग सिस्टम प्रदान करता है जो बड़े डेटा सेंटर्स में उपयोग होता है।
  3. डेस्कटॉप: कई डिस्ट्रीब्यूशन्स लिनक्स का डेस्कटॉप वर्ज़न प्रदान करती हैं, जो व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं के लिए हैं। Ubuntu, Linux Mint, और Fedora जैसी डिस्ट्रीब्यूशन्स बहुत सारे उपयोगकर्ता के लिए आकर्षक हैं।
  4. नेटवर्किंग: लिनक्स का उपयोग नेटवर्क डिवाइसों, जैसे कि राउटर और स्विच, के लिए भी किया जाता है। यह उपकरण इंटरनेट और नेटवर्क कनेक्टिविटी को प्रबंधित करने में मदद करते हैं।

लिनक्स के उपयोग के उदाहरण:

  1. वेब सर्वर: लिनक्स का उपयोग वेब सर्वर के रूप में किया जाता है। उदाहरण के लिए, आप एक ऐसा वेब सर्वर सेटअप कर सकते हैं जिस पर आपकी वेबसाइट और वेब ऐप्लिकेशन होस्ट होते हैं। Apache और Nginx जैसे वेब सर्वर सॉफ़्टवेयर लिनक्स पर प्राधिकृत हैं।
  2. डेस्कटॉप उपयोग: लिनक्स के विभिन्न डिस्ट्रीब्यूशन्स डेस्कटॉप कंप्यूटिंग के लिए उपयोग होते हैं। Ubuntu, जो एक पॉप्युलर डिस्ट्रीब्यूशन है, का उपयोग व्यक्तिगत डेस्कटॉप कंप्यूटर के लिए किया जा सकता है।
  3. डेटा सेंटर्स: लिनक्स डेटा सेंटर्स में विभिन्न कार्यों के लिए उपयोग होता है, जैसे कि डेटाबेस मैनेजमेंट, वर्चुअलाइजेशन, और डेटा स्टोरेज।
  4. नेटवर्किंग उपकरण: लिनक्स का उपयोग नेटवर्किंग डिवाइसों, जैसे कि राउटर और स्विच, के लिए भी किया जाता है।

लिनक्स के लाभ:

लिनक्स के उपयोग से कई लाभ हैं, निम्नलिखित कुछ मुख्य हैं:

  1. मुक्त सॉफ़्टवेयर: लिनक्स मुक्त सॉफ़्टवेयर होता है, जिससे उपयोगकर्ताओं को सॉफ़्टवेयर की मुफ्त और स्वतंत्र उपलब्धि मिलती है।
  2. सुरक्षा: लिनक्स एक सुरक्षित सिस्टम होता है जिसमें बहुत सारे सुरक्षा उपाय होते हैं।
  3. स्थिरता: लिनक्स एक स्थिर और बिना क्रैश के चलने वाला सिस्टम होता है, जिससे उपयोगकर्ताओं को अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।
  4. संवादक टूल्स: लिनक्स पर विभिन्न संवादक टूल्स उपलब्ध हैं, जो प्रोग्रामिंग और डेवलपमेंट को सुविधाजनक बनाते हैं।

लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम एक मुक्त, सुरक्षित, और स्थिर सॉफ़्टवेयर है जो विभिन्न कार्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है। यह उपयोगकर्ताओं को उनकी आवश्यकताओं के आधार पर अपनाने की स्वतंत्रता प्रदान करता है और उन्हें एक सुरक्षित और स्थिर प्लेटफ़ॉर्म प्रदान करता है। इसके विभिन्न डिस्ट्रीब्यूशन्स और विशेषताओं के साथ, लिनक्स एक विविध और उपयोगकर्ता अनुकूलनीय ऑपरेटिंग सिस्टम है जो विभिन्न कार्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है।

लिनक्स डाउनलोड करने के लिए इस लिंक का उपयोग करें: linux.org

ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार | Types of operating system in hindi

कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रमुख प्रकारों की एक सारांशिक जानकारी है:

1. एकल प्रयोजन ऑपरेटिंग सिस्टम (Single-User Operating System):

  • एकल प्रयोजन ऑपरेटिंग सिस्टम वह होता है जिसमें एक ही उपयोगकर्ता एक साथ कंप्यूटर का उपयोग करता है।
  • इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग आमतौर पर व्यक्तिगत कंप्यूटर्स और लैपटॉप्स के लिए होता है।
  • एक उपयोगकर्ता एक समय पर केवल अपने काम को पूरा करने के लिए इसका उपयोग करता है, जैसे कि घरेलू कंप्यूटर यूज़र।
  • उपयोगकर्ता के काम के अनुसार इसकी सामान्य उपयोगिता होती है, जैसे कि वेब ब्राउज़िंग, डॉक्यूमेंट श्रेणी, और गेमिंग।

2. बहुप्रयोजन ऑपरेटिंग सिस्टम (Multi-User Operating System):

  • बहुप्रयोजन ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) में कई उपयोगकर्ता एक ही कंप्यूटर को साझा करते हैं और उसका उपयोग करते हैं।
  • इसका उपयोग विशेष रूप से सर्वर और मेनफ्रेम कंप्यूटर्स पर होता है, जहां बड़ी संख्या में उपयोगकर्ता सेवाएं प्रदान करती हैं।
  • इस प्रकार का ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) विभिन्न उपयोगकर्ताओं के लिए एकत्र विभिन्न संवादकों का साझा उपयोग करने में मदद करता है, जैसे कि कॉर्पोरेट नेटवर्क और वेब होस्टिंग सेवाएं।
  • इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) में उपयोगकर्ताओं की पहचान, सुरक्षा और प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाती है।

3. यूनीकर्णल ऑपरेटिंग सिस्टम (Monolithic Operating System):

  • यूनीकर्णल ऑपरेटिंग सिस्टम में सभी ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्य एक ही कर्णेल (Kernel) में एकत्र होते हैं।
  • इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग विभिन्न संवादकों और सेवाओं के लिए होता है, और यह उपयोगकर्ताओं को विभिन्न सॉफ़्टवेयर का उपयोग करने की अनुमति देता है।
  • इसके अंदर के कर्णेल विभिन्न ऑपरेटिंग सिस्टम सेवाओं को प्रबंधित करते हैं, जैसे कि फ़ाइल सिस्टम, प्रोसेस मैनेजमेंट, और नेटवर्क कंट्रोल।
  • यह प्रकार का ऑपरेटिंग सिस्टम बहुत सारे सेवाओं के साथ विभिन्न कार्यों के लिए उपयुक्त होता है, लेकिन इसकी जटिलता हो सकती है।

4. माइक्रोकर्णल ऑपरेटिंग सिस्टम (Microkernel Operating System):

  • माइक्रोकर्णल ऑपरेटिंग सिस्टम में केवल मिनिमल कर्णेल में केवल मिनिमल फ़ंक्शनस केवल (जैसे कि प्रोसेस कंट्रोल और मेमोरी मैनेजमेंट) के लिए होते हैं, और अन्य सेवाएं अलग-अलग संवादकों में चलती हैं।
  • इसका मुख्य लक्ष्य ऑपरेटिंग सिस्टम को लाइटवेट और सुरक्षित बनाना होता है, क्योंकि सेवाएं कर्णेल के बाहर अलग होती हैं।
  • इसका उपयोग सुरक्षित और स्थिर सिस्टम की आवश्यकता होने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए होता है, जैसे कि सर्वर और नेटवर्क सुरक्षा सिस्टम्स।
  • माइक्रोकर्णल ऑपरेटिंग सिस्टम अपने मिनिमलिस्ट डिज़ाइन के साथ प्रबल और सुरक्षित ऑपरेटिंग सिस्टम प्रदान करता है।

5.डिस्ट्रीब्यूटेड ऑपरेटिंग सिस्टम (Distributed Operating System):

    • इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम में कई कंप्यूटर एक साथ काम करते हैं और एक बड़े नेटवर्क के हिस्से के रूप में कार्य करते हैं।
    • इसका उपयोग बड़े और जटिल कार्यों के लिए होता है, जैसे कि वैशिष्ट्यक वेब सेवाएं, डेटाबेस सिस्टम्स, और संगठनों के लिए बड़े संख्या में उपयोगकर्ताओं की सेवाएं प्रदान करने के लिए।

6.विर्चुअल मशीन ऑपरेटिंग सिस्टम (Virtual Machine Operating System):

    • इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम में वर्चुअल मशीन (Virtual Machine) को उपयोग करके एक संवादक ऑपरेटिंग सिस्टम को दूसरे कंप्यूटर पर सिम्युलेट किया जा सकता है।
    • यह उपयोगकर्ताओं को अलग-अलग ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग करने की अनुमति देता है, जिससे हार्डवेयर संवादकों का साझा उपयोग किया जा सकता है।

7.एम्बेडेड ऑपरेटिंग सिस्टम (Embedded Operating System):

    • यह प्रकार का ऑपरेटिंग सिस्टम विशेष उपयोगकर्ता डिवाइसों, जैसे कि स्मार्टफोन, व्यक्तिगत डिजिटल सहायक (PDA), और एम्बेडेड सिस्टम्स के लिए डिज़ाइन किया जाता है।
    • इसका उपयोग संवादकीय उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों के लिए होता है, जो किसी विशिष्ट कार्य को पूरा करने के लिए निर्मित होते हैं।

इनमें से प्रत्येक प्रकार का ऑपरेटिंग सिस्टम अपने विशेष कार्यों और उपयोगकर्ता आवश्यकताओं के अनुसार डिज़ाइन किया जाता है।

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम | Time sharing operating system in hindi

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Time Sharing Operating System) एक प्रकार का कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम होता है जो कई उपयोगकर्ताओं को एक ही कंप्यूटर पर साझा कंप्यूटिंग रिसोर्स (संसाधन) का उपयोग करने की अनुमति देता है। इसका मुख्य उद्देश्य कंप्यूटर के संसाधनों को विभिन्न उपयोगकर्ताओं के बीच समय का साझा उपयोग करने के लिए उपयोगकर्ता को अनुमति देना है, ताकि एक समय पर कई उपयोगकर्ता अपने कार्यों पर काम कर सकें।

टाइम शेयरिंग के मुख्य विशेषताएँ:

  1. मल्टिटास्किंग: टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम का मुख्य फायदा यह है कि यह मल्टिटास्किंग का समर्थन करता है। इसका मतलब है कि विभिन्न उपयोगकर्ताएं एक साथ कई कार्यों पर काम कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, एक कंप्यूटर पर एक उपयोगकर्ता वेब ब्राउज़िंग करते हुए हैं, जबकि दूसरा उपयोगकर्ता डॉक्यूमेंट्स बना रहा है और तीसरा उपयोगकर्ता गेम खेल रहा है।

  2. संवादक टर्मिनल्स: टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोगकर्ता एक संवादक टर्मिनल का उपयोग करके करता है। ये संवादक टर्मिनल्स दूरस्थ कंप्यूटर से कंप्यूटर से जुड़ने का माध्यम होते हैं, जिनके माध्यम से उपयोगकर्ता कंप्यूटर संसाधनों का उपयोग करता है।
  3. टाइम शेयरिंग: टाइम शेयरिंग का मतलब होता है कि कंप्यूटर का समय अलग-अलग उपयोगकर्ताओं के बीच साझा किया जाता है। हर उपयोगकर्ता को एक निर्दिष्ट समय स्लॉट दिया जाता है, जिसके दौरान वह कंप्यूटर का उपयोग कर सकता है।
  4. सुरक्षा: इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम में सुरक्षा बढ़ाई जाती है। हर उपयोगकर्ता को केवल उनके खुद के डेटा और फ़ाइल्स तक पहुँचने की अनुमति दी जाती है ताकि एक उपयोगकर्ता दूसरे उपयोगकर्ता के डेटा तक पहुँच न सके।

उपयोगकर्ता:

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग बड़े स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, गवर्नमेंट ऑफिसेस, व्यावासिक संगठनों, और अन्य जगहों पर किया जाता है जहाँ कई उपयोगकर्ताएँ एक साथ कंप्यूटर संसाधनों का उपयोग करती हैं। यह उनके बीच समय और संसाधनों को प्रबंधित करने में मदद करता है और कंप्यूटर संसाधनों का अधिक उपयोग करने की स्वतंत्रता देता है।

संक्षेप:

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम विभिन्न उपयोगकर्ताओं के बीच संसाधनों का साझा उपयोग करने की अनुमति देता है और मल्टिटास्किंग की अनुमति देता है। यह संवादक टर्मिनल्स का उपयोग करके काम करता है और सुरक्षित डेटा एक्सेस की गारंटी देता है। इसका प्रमुख उपयोग शिक्षा और व्यवसायिक वातावरणों में होता है जहां कई उपयोगकर्ताएँ कंप्यूटर संसाधनों का साझा उपयोग करती हैं।

ऑपरेटिंग सिस्टम के उपयोग क्षेत्र  | Applications of Operating System

Operating System Types

ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग कंप्यूटर और उपयोगकर्ताओं के बीच संवाद, संश्लेषण, और संचालन के विभिन्न क्षेत्रों में होता है। यहां, ऑपरेटिंग सिस्टम के उपयोग के कुछ मुख्य क्षेत्रों का विवरण है:

  1. प्रयोग सॉफ़्टवेयर (Application Software): ऑपरेटिंग सिस्टम उपयोगकर्ताओं को प्रयोग सॉफ़्टवेयर का उपयोग करके विभिन्न कार्यों को करने में मदद करता है, जैसे कि वर्ड प्रोसेसिंग, स्प्रेडशीट, ग्राफ़िक्स डिज़ाइन, और गेमिंग।
  2. सर्वर ऑपरेटिंग सिस्टम (Server Operating System): सर्वर ऑपरेटिंग सिस्टम बड़े विशाल नेटवर्क और डेटा सेंटर्स में उपयोग होता है जो विभिन्न सेवाओं को प्रदान करते हैं, जैसे कि वेब होस्टिंग, डेटाबेस सर्वर, और इमेल सर्वर।
  3. वैशिष्ट्यक सिस्टम (Embedded Systems): ऑपरेटिंग सिस्टम वैशिष्ट्यक सिस्टम्स में उपयोग होता है जैसे कि स्मार्टफोन, विज्ञान प्रयोगशाला के उपकरण, और ऑटोमोटिव सिस्टम्स।
  4. मल्टीमीडिया एप्लीकेशन्स (Multimedia Applications): ऑपरेटिंग सिस्टम मल्टीमीडिया एप्लीकेशन्स के प्रयोग के दौरान वीडियो, ऑडियो, ग्राफ़िक्स, और अन्य मल्टीमीडिया कंटेंट को प्रबंधित करता है, जैसे कि म्यूज़िक प्लेयर और वीडियो एडिटिंग सॉफ़्टवेयर।
  5. नेटवर्किंग (Networking): ऑपरेटिंग सिस्टम नेटवर्किंग के लिए भी उपयोग होता है, जैसे कि इंटरनेट ब्राउज़िंग, डाटा साझा करना, और नेटवर्क सुरक्षा।
  6. वर्चुअलिज़ेशन (Virtualization): वर्चुअलिज़ेशन ऑपरेटिंग सिस्टम के माध्यम से एक ही हॉस्ट कंप्यूटर पर कई वर्चुअल मशीन्स को होस्ट करने में मदद करता है, जिससे सर्वर संसाधनों का अधिक उपयोग किया जा सकता है।
  7. प्रोग्रामिंग और डेवलपमेंट (Programming and Development): डेवलपर्स ऑपरेटिंग सिस्टम के रूप में विभिन्न प्रोग्रामिंग और डेवलपमेंट उपकरणों का उपयोग करते हैं ताकि वे सॉफ़्टवेयर विकसित कर सकें।
  8. व्यवसायिक उपयोग (Business Use): व्यावसायिक उपयोगकर्ताएं ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग अपने ऑफिस कार्यों, वित्तीय प्रबंधन, और डेटा एनालिटिक्स में करती हैं।
  9. सुरक्षा (Security): ऑपरेटिंग सिस्टम सुरक्षा के लिए अहम होता है और उपयोगकर्ताओं के डेटा और सिस्टम को हैकिंग और वायरसों से सुरक्षित रखता है।
  10. कॉन्फ़िगरेशन और प्रबंधन (Configuration and Management): ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग सिस्टम की कॉन्फ़िगरेशन और प्रबंधन के लिए किया जाता है, जिससे सिस्टम का सही रूप से काम करना सुनिश्चित किया जा सकता है।
  11. कंप्यूटर ग्राफ़िक्स (Computer Graphics): ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर ग्राफ़िक्स ऐप्लिकेशन्स को रंग, फ़ॉन्ट्स, और ग्राफ़िक्स को सही तरीके से प्रबंधित करने में मदद करता है, जैसे कि डिज़ाइन और वीडियो एडिटिंग सॉफ़्टवेयर।
  12. नॉन-कंप्यूटिंग उपयोग (Non-Computing Uses): ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग कंप्यूटरों के बाहर भी होता है, जैसे कि ऑटोमोटिव सिस्टम्स, उद्योग के नियंत्रण सिस्टम, और औद्योगिक उपकरणों में।

यह सभी क्षेत्र ऑपरेटिंग सिस्टम के महत्व को दर्शाते हैं और इसकी अनिवार्यता को समझाते हैं, जब बात कंप्यूटर और सिस्टम के संचालन की होती है।

रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम | Real time operating system

रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम (RTOS) एक प्रकार का कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम होता है जो कंप्यूटर और संचालित प्रयोगों के बीच समय के साथी रूप से इंटरफेस करता है और सचेत तथा संचालन की गरीब क्षणिकता (Real-Time) की जरूरत होती है। इसका मतलब होता है कि RTOS को निर्दिष्ट समय सीमाओं के भीतर कार्य करने की क्षमता होती है और यदि कोई कार्य समय पर पूरा नहीं होता है, तो इसके परिणामस्वरूप समय का हानि हो सकता है।

रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार:

रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम के विभिन्न प्रकार होते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:

  1. खासगी रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम (Hard Real-Time Operating System): इस प्रकार का RTOS निर्दिष्ट समय सीमा के भीतर कार्य करने की गरंटी देता है, और यदि कार्यक्रम निर्दिष्ट समय पर पूरा नहीं होता है, तो यह सिस्टम असफल माना जाता है। उदाहरण के लिए, विमानों के नेविगेशन, अंतरिक्ष उपयोग, और सैन्य उपयोग हार्ड रीयल-टाइम सिस्टम के उदाहरण हो सकते हैं।

  2. सॉफ़्ट रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम (Soft Real-Time Operating System): इस प्रकार का RTOS निर्दिष्ट समय लक्ष्य को पूरा करने की प्राथमिकता नहीं देता है, लेकिन इसका प्रयोग कार्य को समय पर करने के लिए प्रोत्साहित करता है। इसका उपयोग वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग, वेब स्ट्रीमिंग, और डेटा प्रसंस्करण जैसे उपयोगों में हो सकता है, जहाँ समय की छमाही की गरीबी सामान्य होती है।
  3. इवेंट ड्राइवन रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम (Event-Driven Real-Time Operating System): यह प्रकार का RTOS इवेंट्स और इवेंट के आगमन पर विशेष ध्यान केंद्रित करता है। इसका उपयोग सुरक्षा प्रणालियों, डेटा संचालन, और इवेंट प्रसंस्करण में हो सकता है, जहाँ समय-बद्ध निष्पादन की जरूरत होती है।
  4. मुल्टी-टास्किंग रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम (Multi-Tasking Real-Time Operating System): यह प्रकार का RTOS कई कार्यक्रमों को समय सीमा के अंदर पूरा करने की अनुमति देता है, लेकिन इन कार्यक्रमों के बीच प्राथमिकता को प्रबंधित करता है।

रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम के उपयोग क्षेत्र (Applications of Real-Time Operating System)

रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम के अनेक उपयोग क्षेत्र होते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं:

  1. विमानिकी और अंतरिक्ष उपयोग: रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम विमानों, उपग्रहों, और अंतरिक्ष उपयोग के लिए आवश्यक होता है। यह सिस्टम नेविगेशन, डेटा संचालन, और सुरक्षा में मदद करता है।

  2. सैन्य उपयोग: सैन्य डिफेंस और सुरक्षा सिस्टम्स में RTOS का प्रयोग वैशिष्ट्यक रूप से समय-बद्ध निष्पादन और कंट्रोल के लिए होता है।
  3. मैडिकल उपयोग: चिकित्सा उपकरणों और मेडिकल मॉनिटरिंग में भी RTOS का उपयोग होता है, जैसे कि हृदय मॉनिटर्स, इमेजिंग सिस्टम्स, और ऑपरेटिंग थिएटर की निगरानी।
  4. ऑटोमोटिव सिस्टम्स: गाड़ियों, ट्रक्स, और ट्रेन्सपोर्टेशन सिस्टम्स में RTOS का प्रयोग होता है, जो सुरक्षा और संचालन की जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है।
  5. इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT): इंटरनेट ऑफ थिंग्स में भी RTOS का उपयोग होता है, जो संचालन और डेटा प्रसंस्करण के लिए आवश्यक होता है।
  6. रोबोटिक्स: रोबोटिक्स में RTOS रोबोट के संचालन और निगरानी के लिए उपयोग होता है, जिससे वे कार्यों को समय सीमा के अंदर पूरा कर सकते हैं।
  7. वाणिज्यिक उपयोग: RTOS का व्यावसायिक क्षेत्रों में भी उपयोग होता है, जैसे कि उद्योग नियंत्रण सिस्टम्स और उद्योगों के विभिन्न प्रक्रियाओं की निगरानी में।

रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम की विशेषताएँ

रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम की कुछ महत्वपूर्ण विशेषताएँ होती हैं:

  1. समय प्रतिबद्धता (Time Determinism): RTOS की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है कि यह समय की निश्चितता के साथ काम करता है, जिससे इंटरफेस कर रहे प्रयोगों को समय सीमा के अंदर कार्य करने में सहायक होता है।

  2. प्राथमिकता (Priority): RTOS में कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे उच्च प्राथमिकता के कार्यक्रम अन्य कार्यक्रमों के साथ इंटरफेस कर सकते हैं।
  3. इवेंट ड्राइवन: RTOS इवेंट पर ध्यान केंद्रित होता है और इवेंट के आगमन पर क्रियाओं को आरंभ करता है।
  4. सुरक्षा: इसका उपयोग सुरक्षा सिस्टमों में समय-बद्ध निष्पादन और संचालन के लिए होता है, जिससे गुप्त डेटा को सुरक्षित रखा जा सकता है।
  5. मैनिजमम स्वरूप (Minimum Footprint): RTOS को संचालित करने के लिए कम संग्रहण की जरूरत होती है, जिससे यह संचालन के लिए सुचाना कमीशन प्रदान करता है।

रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम के उपाय:

रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम के उपयोग के साथ आने वाले चुनौतियों का सामना करने के लिए कुछ उपाय होते हैं:

  1. डिज़ाइन का सटीक होना: रीयल-टाइम सिस्टम के डिज़ाइन को सटीक और ध्यानपूर्वक रूप से किया जाना चाहिए, क्योंकि इसमें समय की बड़ी महत्वपूर्णता होती है।

  2. समय के साथ संचालन: RTOS के लिए अनुसंधान और विकास समय के साथ संचालन करने वाले प्रोग्रामरों और इंजीनियरों की टीम के साथ किया जाना चाहिए।
  3. सुरक्षा की जरूरत: इसके उपयोग में सुरक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, ताकि निरंतर संचालन को हैकिंग और नुकसान से बचाया जा सके।
  4. डेटा के संचालन: RTOS डेटा को समय पर प्रसंस्करण करने की क्षमता होती है, जिससे समय-बद्ध प्रतिक्रिया दी जा सकती है।
  5. हार्डवेयर समर्थन: इसके लिए समर्थन करने वाले हार्डवेयर के साथ आने वाले चुनौतियों को समझने की आवश्यकता होती है, ताकि समय सीमा के अंदर संचालन किया जा सके।

रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम (RTOS) एक महत्वपूर्ण कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम होता है जो समय की महत्वपूर्णता के साथ काम करता है। इसका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है, जैसे कि विमानिकी, सैन्य, मैडिकल, औटोमोटिव, और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) में। इसका डिज़ाइन सटीक होना चाहिए और समय के साथ संचालन किया जाना चाहिए ताकि यह अपने उपयोगकर्ताओं को निष्पादन में सहायक हो सके।

ऑपरेटिंग सिस्टम | windows operating system in hindi

Windows एक प्रमुख कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) है जो Microsoft Corporation द्वारा विकसित और प्रकाशित किया जाता है। यह ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर और उपयोगकर्ताओं के बीच संचालन, डेटा प्रसंस्करण, और एप्लिकेशन चलाने के लिए एक माध्यम प्रदान करता है। Windows एक ग्राफिकल यूज़र इंटरफेस (GUI) वाला ऑपरेटिंग सिस्टम है, जिसमें उपयोगकर्ता ग्राफिकल प्रतिक्रिया के माध्यम से कंप्यूटर को निर्देशित कर सकते हैं।

Windows के प्रमुख विशेषताएँ:

  1. ग्राफिकल यूज़र इंटरफेस: Windows का एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह ग्राफिकल यूज़र इंटरफेस प्रदान करता है, जिससे उपयोगकर्ता आसानी से माउस और कीबोर्ड के माध्यम से कंप्यूटर को निर्देशित कर सकते हैं।
  2. बहुमौद्रिकता (Multitasking): Windows उपयोगकर्ताओं को एक ही समय में कई एप्लिकेशन चलाने की अनुमति देता है, जिससे उपयोगकर्ताएँ एक साथ कई कार्यों को प्राप्त कर सकती हैं।
  3. एप्लिकेशन समर्थन: Windows बहुत सारे एप्लिकेशन्स का समर्थन करता है, जिसमें विशाल श्रृंगी, ब्यूरो सॉफ़्टवेयर, गेम्स, और विभिन्न उपयोगी टूल्स शामिल हैं।
  4. नेटवर्क संचालन: Windows नेटवर्क संचालन का समर्थन करता है, जिससे उपयोगकर्ताएँ इंटरनेट पर सर्च कर सकती हैं, ईमेल भेज सकती हैं, और नेटवर्क के माध्यम से अन्य कंप्यूटरों से जुड़ सकती हैं।
  5. सुरक्षा: Windows में सुरक्षा के लिए विभिन्न उपाय हैं, जैसे कि फ़ायरवॉल, एंटीवायरस, और इंटरनेट सुरक्षा सॉफ़्टवेयर।
  6. अपडेट्स: Microsoft नियमित रूप से Windows के अपडेट प्रदान करता है, जिसमें सुरक्षा और संचालन को बेहतर बनाने वाली सुधारें शामिल होती हैं।

Windows के विभिन्न संस्करण:

Windows के विभिन्न संस्करण हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख संस्करण निम्नलिखित हैं:

  1. Windows 3.1: यह Windows का पहला संस्करण था जो 1992 में जारी किया गया था। इसमें ग्राफिकल यूज़र इंटरफेस का पहला प्रयास था।
  2. Windows 95: Windows 95 ने 1995 में लॉन्च किया गया और इसमें स्टार्ट मेनू, टास्कबार, और स्टार्ट बटन की शुरुआत की गई।
  3. Windows XP: Windows XP 2001 में आया और यह एक प्रमुख सफलता था। इसमें सुरक्षा और स्थिरता के कई सुधारें थीं।
  4. Windows 7: Windows 7 ने 2009 में लॉन्च किया गया और इसमें ग्राफिकल यूज़र इंटरफेस को और भी बेहतर बनाया गया था।
  5. Windows 10: Windows 10 2015 में लॉन्च हुआ और इसमें कई नई फीचर्स, सुरक्षा सुधारणाएँ, और कॉर्टना जैसे वॉयस एसिस्टम शामिल हैं।
  6. Windows 11: Windows 11 ने 2021 में लॉन्च किया गया है और इसमें ग्राफिकल इंटरफेस को मॉडर्न और बेहतर बनाने के लिए कई बदलाव किए गए हैं।

Windows एक व्यापक उपयोगकर्ता आधार वाला ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) है जिसका उपयोग व्यक्तिगत और व्यावसायिक उपयोगों के लिए किया जा सकता है, और यह कंप्यूटर और उपकरणों को संचालित करने में मदद करता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्य | Functions of operating system

  1. प्रसंस्करण संचालन (Process Management): ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) प्रोसेसेस को प्रबंधित करता है। यह प्रोसेस क्रिएशन, प्रोसेस तारीख और समय स्लाइसिंग, प्रोसेसों के बीच संचालन स्विचिंग, और प्रोसेसों के अंत की प्रबंधन करता है।

  2. मेमोरी प्रबंधन (Memory Management): यह ऑपरेटिंग सिस्टम(Operating System) के द्वारा मेमोरी के साथ प्रतिनिधिता को प्रबंधित करता है। यह मेमोरी की अदिलत विभाजन, पेजिंग, स्वैपिंग, और कैशिंग जैसे कार्यों का संचालन करता है।
  3. फ़ाइल सिस्टम प्रबंधन (File System Management): यह फ़ाइल्स और फ़ोल्डर्स को संचालित करता है और उन्हें संचित करने और पहुंचने की अनुमति प्रदान करता है। यह फ़ाइलों की सुरक्षा, लोग, और अनुमतियों को प्रबंधित करता है।
  4. इनपुट-आउटपुट प्रबंधन (Input-Output Management): इसका कार्य है इनपुट और आउटपुट डिवाइसेस के साथ संचालन करना, जैसे की कीबोर्ड, माउस, प्रिंटर, और स्टोरेज डिवाइसेस।
  5. वाणिज्यिक प्रबंधन (Job Scheduling): यह ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) के द्वारा जॉब्स या प्रोसेसेस के संचालन की प्राथमिकता को प्रबंधित करता है। इसमें समय-मूल्यांकन और योजना बनाने के लिए विभिन्न एल्गोरिथम्स का उपयोग किया जाता है।
  6. सुरक्षा और अनुमतियाँ (Security and Permissions): ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) सुरक्षा को प्रबंधित करता है और उपयोगकर्ताओं को विभिन्न स्तरों की अनुमतियों के साथ एक दूसरे के साथ संचालन करने की अनुमति देता है।
  7. नेटवर्क कम्युनिकेशन (Network Communication): ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) नेटवर्क के माध्यम से डेटा संचालन और संचालन करने में मदद करता है, जो अन्य कंप्यूटरों और उपकरणों के साथ संचालन कर सकता है।
  8. पैरामीटर कॉन्फ़िगरेशन और मॉनिटरिंग (Parameter Configuration and Monitoring): ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) उपयोगकर्ताओं को पैरामीटर्स को कॉन्फ़िगर करने और सिस्टम की स्थिति को मॉनिटर करने की अनुमति देता है, जैसे कि प्रोसेस और मेमोरी का उपयोग।
  9. एरर हैंडलिंग (Error Handling): ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) गलतियों और त्रुटियों को प्रबंधित करता है और उपयोगकर्ताओं को उन्हें सही करने में मदद करता है।
  10. सुविधा प्रबंधन (Utility Management): ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) उपयोगकर्ताओं को विभिन्न उपयोगी उपकरणों के साथ संचालन करने की सुविधा प्रदान करता है, जैसे कि डिस्क क्लीनअप, वायरस स्कैनर्स, और अन्य उपकरण।
  11. संचालन प्रबंधन (Job Management): यह टास्क्स, प्रोसेसेस, और जॉब्स के बीच संचालन को प्रबंधित करता है और उन्हें प्राथमिकता देता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) के इन कार्यों का संचालन करने से यह सुनिश्चित करता है कि कंप्यूटर सिस्टम सही तरीके से काम करता है और उपयोगकर्ताओं को एक आसान और व्यापक तरीके से उपयोग करने में मदद करता है।

बैच ऑपरेटिंग सिस्टम | batch operating system

बैच ऑपरेटिंग सिस्टम (Batch Operating System) एक प्रकार का कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) है जिसमें कंप्यूटर प्रोसेसिंग कार्यों को एक सीरीज में बच जाता है, यानी एक के बाद एक कार्य निष्पादित होते हैं। इसमें प्रयोक्ता का सीधा इंटरएक्शन नहीं होता है, और कंप्यूटर कार्य बच्चों (बैचेस) में ग्रुप के रूप में प्रोसेस करता है।

हार्ड डिस्क और कार्ड रीडर में बैच प्रोसेसिंग तकनीक लागू की गई। इसमें सभी जॉब्स को बैच फॉर्म के रूप में उनके निष्पादन के लिए जॉब्स का पूल बनाने के लिए हार्ड डिस्क पर सेव किया जाता है। सभी पूल किए गए जॉब्स को पढ़ने के बाद निष्पादित करने के लिए बैच मॉनिटर प्रारंभ किया गया है। इन जॉब्स को ग्रुप में विभाजित किया जाता है, और अंत में समान जॉब्स से पहले समान बैच के लिए किया जाता है। अब सभी बैच जॉब बिना ज्यादा समय बर्बाद किए एक-एक करके निष्पादन के लिए तैयार हैं, और इस सिस्टम की वजह से टर्नअराउंड समय को कम करते हुए सिस्टम उपयोग में बढ़ोतरी हटी है।

इसके मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. बैच प्रोसेसिंग: कंप्यूटर कार्यों को बैच में एक साथ निष्पादित किया जाता है, इसका मतलब है कि कार्यों को क्रमिक रूप से प्रोसेस किया जाता है, बिना उपयोक्ता के सीधे प्रयोगकर्ता इंटरएक्टिविटी के साथ।

  2. श्रम कमी: बैच ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) में, एक बार में कई कार्यों को प्रोसेस किया जाता है, जिससे काम की दिशा में श्रम कमी होती है और काम की प्रवृत्ति में सुधार होता है।
  3. कार्यों की प्राथमिकता: बैच ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) में, कार्यों को प्राथमिकता और अवधि के आधार पर श्रेणीबद्ध किया जाता है, जिसका मतलब है कि किस कार्य को पहले निष्पादित किया जाएगा यह सिस्टम द्वारा निर्धारित होता है।
  4. बैच कार्य प्राप्ति: इस तरह के सिस्टम में, कार्यों का आदान-प्रदान बैच फाइल्स के माध्यम से होता है, जिसके लिए एक स्पेशल बैच प्रोसेसिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है।

बैच ऑपरेटिंग सिस्टम ज्यादातर बड़े और प्रोफेशनल कंप्यूटर प्रयोग के लिए उपयोग होता है, जैसे कि वैशिष्ट्यिक उपयोगकर्ता, वेब सर्वर, डेटा सेंटर, और साइंटिफिक कंप्यूटिंग आदि।

बैच ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार | Types of Batch Operating Systems

  1. Simple Batched System
  2. Multi-Programmed Batched System

Simple Batched System – जिस ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) में यूजर और कंप्यूटर के बीच कोई इंटरेक्शन नहीं होता है, उसे हम सिंपल बैचेड सिस्टम कहते हैं। सरल भाषा में यूजर सीधे कंप्यूटर को कमांड नहीं दे सकता है। कमांड या निर्देश देने के लिए यूजर को पंच कार्ड का इस्तेमाल करना होता है। तब कंप्यूटर किसी भी जॉब्स को निष्पादित करने में सक्षम होता है।

Multi-Programmed Batched System – इस ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) में सबसे पहले जॉब का चयन किया जाता है। जॉब्स का चयन करने के बाद मेमोरी की मदद से एक-एक करके जॉब को निष्पादित किया जाता है। सीपीयू हमेशा मल्टी-प्रोग्राम्ड बैचेड सिस्टम में व्यस्त रहता है। यानी सीपीयू को जॉब्स को एक्सीक्यूट करने के लिए काफी काम करना पड़ता है।

कैसे काम करता है बैच ऑपरेटिंग सिस्टम? | How does a batch operating system work?

जॉब्स की संख्या को ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) मेमोरी में रखता है और उन्हें एक-एक करके निष्पादित करता है। नौकरियों को पहले आओ पहले पाओ के आधार पर संसाधित किया जाता है। प्रत्येक कार्य सेट को एक बैच के रूप में परिभाषित किया गया है। जब कोई कार्य समाप्त हो जाता है, तो उसकी मेमोरी मुक्त हो जाती है, और कार्य के आउटपुट को बाद में मुद्रण (छपाई) या प्रोसेसिंग के लिए आउटपुट स्पूल में स्थानांतरित कर दिया जाता है। बैच ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) में यूजर इंटरेक्शन सीमित है। जब सिस्टम यूजर से काम लेता है तो यूजर फ्री होता है। आप किसी भी लेनदेन या रिकॉर्ड से संबंधित डेटा को अपडेट करने के लिए बैच प्रोसेसिंग सिस्टम का भी उपयोग कर सकते हैं।

नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम | Network Operating System

नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम (Network Operating System – NOS) कंप्यूटर नेटवर्क को संचालित करने और प्रबंधित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह सिस्टम नेटवर्क के विभिन्न घटकों को संचालित करने के लिए आवश्यक फंक्शनलिटी प्रदान करता है, जैसे कि फ़ाइल सेवा, प्रिंटिंग सेवा, सुरक्षा और प्रबंधन। यह नेटवर्क को एक समृद्धि और संगठनत तरीके से संचालित करने में मदद करता है ताकि उपयोगकर्ता आसानी से डेटा और संसाधनों का साझा कर सकें और विभिन्न कंप्यूटरों के बीच संचालन को सरल बना सकें।

नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) का प्रमुख उद्देश्य नेटवर्क विन्यास, प्रबंधन, सुरक्षा, और संचालन को सुनिश्चित करना है। इसके द्वारा, विभिन्न कंप्यूटरों और डिवाइसों को एक साथ काम करने में मदद मिलती है, जिससे संगठनों को उनके नेटवर्क को अधिक प्रभावी और सुरक्षित तरीके से प्रबंधित करने का अवसर मिलता है।

नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) के मुख्य फ़ंक्शन:

  1. संचालन (Operation): यह उपकरणों को संचालित करने और नेटवर्क को प्रबंधित करने के लिए आवश्यक फ़ंक्शन्स प्रदान करता है। यह डेटा पैकेट के प्रेषक और प्राप्तकर्ता के बीच संचालन को संचालित करता है और उन्हें नेटवर्क संचालन के लिए संचालक (controller) के रूप में कार्य करने में मदद करता है।
  2. फ़ाइल सेवा (File Services): NOS उपयोगकर्ताओं को फ़ाइल सेवा की सुविधा प्रदान करता है, जिससे वे अपने डेटा को नेटवर्क पर सहयोगी तरीके से संचित कर सकते हैं और अन्य उपयोगकर्ताओं के साथ साझा कर सकते हैं।
  3. प्रिंटिंग सेवा (Printing Services): NOS प्रिंटरों को संचालित करने और प्रिंटिंग कार्य को प्रबंधित करने के लिए सेवाएं प्रदान करता है, जिससे उपयोगकर्ता अपने दस्तावेज़ों को नेटवर्क प्रिंटर से प्रिंट कर सकते हैं।
  4. सुरक्षा (Security): NOS नेटवर्क की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न सुरक्षा सुविधाएं प्रदान करता है, जैसे कि एक्सेस कंट्रोल और फ़ायरवॉल। यह नेटवर्क को अज्ञात और अनधिकृत उपयोगकर्ताओं से सुरक्षित रखने में मदद करता है।
  5. नेटवर्क कनेक्टिविटी (Network Connectivity): NOS विभिन्न नेटवर्क उपकरणों को संचालित करने और उन्हें नेटवर्क से कनेक्ट करने में मदद करता है, जैसे कि राउटर, स्विच, और हब।
  6. संचालकीय विशेषज्ञता (Administrative Expertise): NOS नेटवर्क प्रबंधन के लिए संचालकों को एक विशेषज्ञ के रूप में काम करने में मदद करता है, जिससे वे नेटवर्क को सफलता से प्रबंधित कर सकते हैं।

नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) के प्रमुख गुण:

  1. सेंट्रलाइज्ड नेटवर्क प्रबंधन (Centralized Network Management): NOS एक सेंट्रलाइजड नियंत्रण केंद्र प्रदान करता है जिससे नेटवर्क की सभी कार्यवाहिकाएँ संचालित और प्रबंधित की जा सकती हैं। इससे नेटवर्क का प्रबंधन और देखभाल सरल हो जाता है।
  2. सुरक्षा: NOS नेटवर्क की सुरक्षा को महत्वपूर्ण रूप से देखता है और विभिन्न सुरक्षा उपायों को प्रदान करता है, जैसे कि वायरस स्कैनिंग, एक्सेस कंट्रोल, और डेटा एन्क्रिप्शन।
  3. विस्तारणशीलता (Scalability): NOS नेटवर्क को विस्तारित करने की सुविधा प्रदान करता है, ताकि संगठन अपनी आवश्यकताओं के हिसाब से नेटवर्क को बढ़ा सके।
  4. वर्कग्रुप और डोमेन (Workgroup and Domain): NOS वर्कग्रुप्स और डोमेन्स के रूप में व्यवस्थित करने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे उपयोगकर्ताएँ और डिवाइस्स व्यवस्थित रूप से समृद्धि से काम कर सकते हैं।
  5. गौरव और डेटा पूना (Redundancy and Data Backup): NOS डेटा की सुरक्षा के लिए गौरव (redundancy) की सुविधा प्रदान करता है जिससे नेटवर्क में आने वाली किसी भी त्रुटि के समय डेटा का नुकसान होने से बचा जा सकता है।

नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए कुछ उपयोगकर्ता द्वारा प्रयुक्त पॉपुलर NOS:

  1. Microsoft Windows Server: यह एक प्रमुख NOS है जिसका उपयोग व्यवसायों और संगठनों में किया जाता है। यह विंडोज सर्वर्स के रूप में जाना जाता है और विभिन्न सेवाएं प्रदान करता है, जैसे कि एक्टिव डायरेक्ट्री और फ़ाइल सेवाएं।
  2. Linux: लिनक्स एक पॉपुलर नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) है जिसका उपयोग खुदरा और व्यापारिक नेटवर्क्स में किया जाता है। इसका मुख्य फायदा यह है कि यह मुफ़्त है और विकासकों द्वारा समर्थन किया जाता है, जिससे उपयोगकर्ता अपने नेटवर्क को विन्यासित कर सकते हैं।
  3. Novell NetWare: यह पहला व्यवसायिक NOS था जो काफी पॉपुलर था, लेकिन अब इसका उपयोग कम हो रहा है। यह फ़ाइल सेवाएं, प्रिंटिंग सेवाएं, और नेटवर्क सुरक्षा की सेवाएं प्रदान करता था।
  4. Cisco IOS (Internetwork Operating System): यह नेटवर्क डिवाइसेस, जैसे कि राउटर और स्विच, के लिए डिज़ाइन किया गया है और व्यवसायिक नेटवर्क्स में उपयोग किया जाता है। इसका प्रमुख उद्देश्य नेटवर्क कनेक्टिविटी को प्रबंधित करना है।

नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) नेटवर्क की सुरक्षा, प्रबंधन, और संचालन को सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं और वे विभिन्न सेवाएं प्रदान करने के लिए बनाए जाते हैं ताकि उपयोगकर्ता और संगठन अपने नेटवर्क संचालन को सरलता से कर सकें। इसके माध्यम से, नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) संगठनों को उनकी डिजिटल यात्रा में मदद करते हैं और उन्हें सफलता प्राप्त करने में सहायक होते हैं।

डेडलॉक ऑपरेटिंग सिस्टम | Deadlock in operating system

संचालन सिस्टम में डेडलॉक (Deadlock) एक स्थिति है जिसमें दो या दो से अधिक प्रक्रियाएँ एक या एक से अधिक संसाधन के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं, लेकिन कोई भी प्रक्रिया आगे बढ़ने में सक्षम नहीं होती है। इस प्रकार की स्थिति से परिणामस्वरूप नेटवर्क संचालन बंद हो जाता है और कोई भी काम नहीं हो पाता है। डेडलॉक एक सीरियस प्रोब्लम होती है और यह संचालन सिस्टम के उपयोगकर्ताओं के लिए असुविधाजनक हो सकता है।

कैसे होता है डेडलॉक?

डेडलॉक का असली कारण होता है संसाधनों के लिए प्राप्ति के लिए प्रक्रियाओं के बीच में संघटना (Interference)। जब कोई प्रक्रिया एक संसाधन का अधिग्रहण करती है, तो वह उस संसाधन को जब तक छोड़ने के लिए विफल होती है, तब तक वह संसाधन को ब्लॉक (Block) कर देती है। जैसे कि एक प्रक्रिया नेटवर्क का एक टेम्पररी लॉक लेती है ताकि वह डेटा पढ़ सके, तो वह लॉक को तब तक नहीं छोड़ सकती जब तक वह अपना काम पूरा नहीं कर लेती है।

अब, अगर एक और प्रक्रिया भी वही संसाधन प्राप्त करने का प्रयास करती है, और यह संसाधन पहली प्रक्रिया द्वारा लॉक किया गया होता है, तो दूसरी प्रक्रिया को रुकना पड़ता है और इंतजार करना पड़ता है क्योंकि यह संसाधन उपलब्ध नहीं होता। साथ ही, पहली प्रक्रिया भी अपने लॉक को जब तक नहीं छोड़ सकती क्योंकि वह डेटा लिख रही है और डेटा लेखने के बिना वह काम पूरा नहीं कर सकती। इसके परिणामस्वरूप, दोनों प्रक्रियाएं आपस में फंस जाती हैं और एक डेडलॉक की स्थिति में आ जाती हैं।

डेडलॉक के बारे में अधिक जानने के लिए क्लिक करें : Deadlock in os in hindi | डेडलॉक क्या है?

FAQ’s | अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1) ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) क्या है?

उत्तर: ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है जो कंप्यूटर हार्डवेयर का प्रबंधन करता है और कंप्यूटर प्रोग्राम के लिए विभिन्न सेवाएँ प्रदान करता है। यह उपयोगकर्ता और कंप्यूटर के हार्डवेयर के बीच मध्यस्थ के रूप में कार्य करता है, सीपीयू, मेमोरी और बाह्य उपकरणों जैसे संसाधनों के उपयोग को नियंत्रित और समन्वयित करता है।

2) हमें ऑपरेटिंग सिस्टम की आवश्यकता क्यों है?

उत्तर: ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) कई कारणों से आवश्यक हैं। वे एक उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफ़ेस प्रदान करते हैं, हार्डवेयर संसाधनों को कुशलतापूर्वक प्रबंधित करते हैं, मल्टीटास्किंग की अनुमति देते हैं और सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। ओएस के बिना, उपयोगकर्ताओं को सीधे हार्डवेयर के साथ इंटरैक्ट करना होगा, जो जटिल और अक्षम है।

3)विभिन्न प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) क्या हैं?

उत्तर: ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) विभिन्न प्रकार के आते हैं, जिनमें शामिल हैं:
एकल-उपयोगकर्ता, एकल-कार्य ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System): ये व्यक्तिगत उपयोग के लिए बुनियादी ऑपरेटिंग सिस्टम हैं। बहु-उपयोगकर्ता ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System): कई उपयोगकर्ताओं के लिए डिज़ाइन किया गया है, अक्सर सर्वर वातावरण में। एकल-कार्य और बहु-कार्य ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System): बाद वाला चलने की अनुमति देता है एक साथ कई अनुप्रयोग। वास्तविक समय ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System): समय पर प्रतिक्रिया के लिए एम्बेडेड सिस्टम में उपयोग किया जाता है। वितरित ऑपरेटिंग सिस्टम: एक नेटवर्क में कई मशीनों को फैलाता है।

4) ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) में कर्नेल की क्या भूमिका है?

उत्तर: कर्नेल एक ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) का मुख्य घटक है। यह हार्डवेयर संसाधनों का प्रबंधन करता है, सुरक्षा लागू करता है और आवश्यक सेवाएं प्रदान करता है। यह अनुप्रयोगों और हार्डवेयर के बीच एक मध्यस्थ के रूप में कार्य करता है, यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक प्रोग्राम को संसाधनों का उचित हिस्सा मिले और वह दूसरों से अलग रहे।

5) विंडोज, मैकओएस और लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) के बीच मुख्य अंतर क्या है?

उत्तर: प्राथमिक अंतर उनके मूल, उपयोगकर्ता इंटरफ़ेस और सॉफ़्टवेयर पारिस्थितिकी तंत्र में निहित हैं। विंडोज़ माइक्रोसॉफ्ट द्वारा विकसित किया गया था और यह अपने व्यापक उपयोग और विभिन्न सॉफ्टवेयर के साथ अनुकूलता के लिए जाना जाता है। Apple द्वारा विकसित macOS, Apple हार्डवेयर के साथ एकीकरण और अपने आकर्षक यूजर इंटरफ़ेस के लिए जाना जाता है। दूसरी ओर, लिनक्स ओपन-सोर्स और उच्च अनुकूलन योग्य है, जिसका उपयोग अक्सर सर्वर वातावरण और तकनीकी उत्साही लोगों द्वारा किया जाता है।

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